राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान-तिरुचि (NIT-T) की शोध टीम अरियामंगलम डंप से निकाले गए जलने योग्य कचरे को पुनः चक्रित करने पर काम कर रही है, जिससे पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। तिरुचि निगम की पहल के तहत लगभग 7.6 लाख घन मीटर कचरे को वैज्ञानिक तरीके से संसाधित किया गया है और इससे 47.7 एकड़ के विशाल क्षेत्र में से 39 एकड़ भूमि को पुनः प्राप्त किया गया है।
इस परियोजना का नेतृत्व सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर एस.टी. रामेश द्वारा किया जा रहा है, जिसमें G. सरवनन (प्रधानमंत्री अनुसंधान सहायक) और सिद्धार्थन (एम. टेक. छात्र) भी शामिल हैं। टीम का उद्देश्य लैंडफिल्स से निकाले गए प्लास्टिक कचरे को पुनः उपयोगी कच्चे माल में बदलने के लिए स्केलेबल विधियाँ विकसित करना है।
टीम ने अरियामंगलम डंप से प्राप्त बायो-माइंड कचरे के जलन योग्य हिस्से को अपशिष्ट से प्राप्त ईंधन (RDF) के रूप में उपयोग करने की योजना बनाई है। यह प्रयास कचरे के पुनः उपयोग और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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इस परियोजना के माध्यम से तिरुचि शहर में कचरा प्रबंधन और पर्यावरण सुधार के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित हो सकता है।
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