देशभर में 7 फरवरी को ओला, उबर, रैपिडो और पोर्टर जैसे ऐप आधारित परिवहन प्लेटफॉर्म से जुड़े चालक राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं। इस हड़ताल के चलते यात्रियों को कैब, ऑटो और बाइक टैक्सी सेवाओं में भारी बाधा का सामना करना पड़ सकता है। इस विरोध को ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ नाम दिया गया है, जिसके तहत हजारों ड्राइवर एक साथ कम से कम छह घंटे के लिए अपने-अपने ऐप से लॉगआउट करेंगे।
यह हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) के आह्वान पर की जा रही है, जिसे देशभर के कई श्रमिक संगठनों का समर्थन प्राप्त है। यूनियन का कहना है कि यह आंदोलन न्यूनतम किराया तय करने, किराया नियमन और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर किया जा रहा है।
कितनी व्यापक होगी सेवाओं में बाधा?
हड़ताल का असर देश के प्रमुख शहरों में देखने को मिल सकता है। कैब, ऑटो-रिक्शा और बाइक टैक्सी सेवाएं कई इलाकों में ठप रह सकती हैं। यूनियन प्रतिनिधियों के अनुसार, ड्राइवर कम से कम छह घंटे तक सेवाएं बंद रखेंगे, हालांकि अलग-अलग शहरों में इसका असर भागीदारी के स्तर पर निर्भर करेगा। चूंकि यह हड़ताल सप्ताहांत पर पड़ रही है, इसलिए सुबह और शाम दोनों समय यात्रियों को दिक्कत हो सकती है।
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हड़ताल का नेतृत्व कौन कर रहा है?
इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन का नेतृत्व तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन कर रही है, जो ऐप आधारित ड्राइवरों का प्रतिनिधित्व करती है। यूनियन ने इसे लंबे समय से लंबित नीतिगत फैसलों और गिग वर्कर्स की बिगड़ती स्थिति के खिलाफ विरोध बताया है।
ड्राइवर हड़ताल पर क्यों जा रहे हैं?
यूनियन नेताओं का कहना है कि तेजी से बढ़ रहे राइड-हेलिंग सेक्टर में किराया मनमाने ढंग से तय किया जा रहा है। मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 लागू होने के बावजूद प्लेटफॉर्म कंपनियां किराए को नियंत्रित नहीं कर रही हैं। सरकार द्वारा न्यूनतम आधार किराया अधिसूचित न किए जाने से ड्राइवरों की आय घट रही है और शोषण बढ़ रहा है।
प्रदर्शनकारी चालकों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
चालकों की मुख्य मांगों में सरकार द्वारा न्यूनतम आधार किराया तय करना, निजी वाहनों के व्यावसायिक उपयोग पर सख्त कार्रवाई, गाइडलाइंस की धारा 17.3 को हटाना, और ड्राइवरों की आय व कार्य परिस्थितियों की कानूनी सुरक्षा शामिल है।
यात्रियों को क्या तैयारी करनी चाहिए?
यूनियन के अनुसार हड़ताल लगभग छह घंटे चलेगी। ऐसे में ऐप आधारित सेवाओं पर निर्भर यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है, खासकर पीक आवर्स के दौरान।
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