जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणा-पत्र 2026 में पहलगाम आतंकी हमले का नाम लिए जाने को भारत की विदेश नीति की बड़ी सफलता बताया है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि जब बैठक में पाकिस्तान के कई सहयोगी मौजूद थे, तब भी पहलगाम का स्पष्ट रूप से उल्लेख होना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने 45 पन्नों वाले नई दिल्ली घोषणा-पत्र 2026 को सर्वसम्मति से मंजूरी दी। इसमें कुल 140 बिंदु शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि किसी भी सदस्य देश ने दस्तावेज पर कोई आपत्ति नहीं जताई और इसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
जब उमर अब्दुल्ला से पूछा गया कि घोषणा-पत्र में पाकिस्तान का नाम सीधे तौर पर क्यों नहीं लिया गया, तो उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर भारत सरकार और विशेष रूप से विदेश मंत्रालय को जवाब देना चाहिए। उन्होंने इसके बजाय घोषणा-पत्र में पहलगाम का जिक्र होने को सकारात्मक पहलू बताया।
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उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पहलगाम हमले की निंदा होना अपने आप में बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि बैठक में पाकिस्तान के कई सहयोगी देश मौजूद थे, इसके बावजूद पहलगाम का नाम लेकर घटना की निंदा की गई। उनके मुताबिक, यह भारत की विदेश नीति की सफलता को दर्शाता है।
घोषणा-पत्र के 40वें बिंदु में कहा गया है कि आतंकवाद का कोई भी कृत्य आपराधिक और अनुचित है, चाहे उसकी वजह कुछ भी हो या उसे किसी ने भी अंजाम दिया हो। ब्रिक्स नेताओं ने आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की। इसमें सीमा पार आतंकवाद, आतंकवादी वित्तपोषण नेटवर्क और आतंकियों को सुरक्षित पनाह मिलने के मुद्दे भी शामिल हैं।
ब्रिक्स नेताओं ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। नेताओं ने आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता, जवाबदेही और संयुक्त राष्ट्र की व्यापक आतंकवाद रोधी संधि को जल्द अपनाने पर जोर दिया।
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