भारतीय तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) की घरेलू एलपीजी पर अंडर-रिकवरी अगस्त 2026 में बढ़कर 62,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी। जुलाई में यह आंकड़ा 59,000 करोड़ रुपये था।
मंत्रालय के अनुसार, सरकार की ओर से कंपनियों को मुआवजा दिए जाने के बावजूद अंडर-रिकवरी बढ़ी है। वित्त वर्ष 2022-23 में सरकार ने ओएमसी को 22,000 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया था, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 में 30,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा रहा है। इसका उद्देश्य घरेलू एलपीजी को उपभोक्ताओं के लिए किफायती बनाए रखना है।
सरकार ने कहा कि सब्सिडी का लाभ केवल वास्तविक और पात्र उपभोक्ताओं तक पहुंचाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से एक अक्टूबर 2026 से सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की रिफिल के लिए आधार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य किया जाएगा। इससे सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए डायवर्जन तथा डुप्लीकेट और अपात्र कनेक्शनों को रोकने में मदद मिलेगी।
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सितंबर में 14.2 किलोग्राम के प्रत्येक सिलेंडर पर निहित सब्सिडी करीब 210 रुपये है, जबकि जून में यह 721 रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई थी।
सरकार ने पिछले महीने राज्यसभा में बताया था कि जुलाई में ओएमसी की एलपीजी अंडर-रिकवरी 59,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई थी। इसके प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र ने करीब 52,000 करोड़ रुपये के मुआवजे का प्रावधान या मंजूरी दी थी।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी आपूर्ति बाधाओं के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है। इससे सब्सिडी वाली घरेलू रसोई गैस की लागत पर दबाव बढ़ा है।
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