महाराष्ट्र के पालघर जिले में कलेक्टर कार्यालय के बाहर हजारों लोग लंबा मार्च निकालते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उन्हें अपनी ज़मीन का मालिकाना हक नहीं मिलता, वे घर नहीं लौटेंगे।
50 वर्षीय द्रौपदी भुयाल ने बताया कि उन्होंने अपनी जीवन का आधा हिस्सा यह सुनिश्चित करने में लगा दिया कि उनकी परिवार की आठ पीढ़ियों से झुकी हुई जमीन का मालिकाना हक उन्हें मिले। उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि मेरे पोते-पोतियों को सरकार के खिलाफ संघर्ष नहीं करना पड़े।"
द्रौपदी भुयाल और अन्य प्रदर्शनकारी कलेक्टर कार्यालय की ओर मार्च करते हुए नारे लगा रहे थे और अपनी मांगों को स्पष्ट कर रहे थे। इनकी प्रमुख मांगें हैं – फॉरेस्ट राइट्स एक्ट के तहत ज़मीन का मालिकाना हक, स्मार्ट मीटरों को हटाना और दहाणू के वाधवन प्रोजेक्ट को रद्द करना, जो पालघर के तटीय क्षेत्र में स्थित है।
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स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वे अपनी ज़मीन के स्वामित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और अब उनकी मांगों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। प्रदर्शन में शामिल लोग यह भी चाहते हैं कि उनकी ज़मीन पर किसी प्रकार का विकास या प्रोजेक्ट उनके अधिकारों को प्रभावित न करे।
इस लंबी मार्च और प्रदर्शन के दौरान प्रशासन ने स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए सुरक्षा उपाय किए हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों का इरादा स्पष्ट है – जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं होंगी, वे अपने हक के लिए आवाज उठाते रहेंगे।
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