संसद का मानसून सत्र 2026 सोमवार 20 जुलाई से शुरू हो गया है। इस सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की कोशिश करेगी, जबकि विपक्ष नीट (यूजी) पेपर लीक, सोनम वांगचुक के विरोध प्रदर्शन, कथित राम मंदिर दान चोरी मामले, ई-20 पेट्रोल नीति और परिसीमन संविधान संशोधन विधेयक जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी में है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी सांसदों से अपील की है कि वे संसद की कार्यवाही में पूरी गंभीरता और उत्साह के साथ हिस्सा लें। उन्होंने कहा कि देश के विकास और लोकतंत्र की मजबूती के लिए सदन का सुचारु संचालन जरूरी है। सरकार ने विपक्षी दलों से भी रचनात्मक चर्चा में भाग लेने और संसद की कार्यवाही चलाने में सहयोग करने की अपील की है।
इस बार का मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलेगा। इसमें कुल 25 दिनों की अवधि में 19 बैठकें होंगी। विपक्षी दलों में हालिया राजनीतिक बदलावों के बाद संसद में समीकरण भी बदले हुए नजर आएंगे।
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केंद्र सरकार इस सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक फिर से पेश करने की तैयारी कर सकती है। इस विधेयक में लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव है। इससे पहले अप्रैल में यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण पारित नहीं हो सका था।
सत्र की शुरुआत कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित 'चलो संसद' मार्च के बीच हो रही है। सीजेपी नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रही है।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस मार्च के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया है। सीजेपी पिछले कुछ समय से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है, जो संसद भवन से लगभग 2-3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
पुलिस द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद प्रदर्शन और तेज हो गया। वांगचुक 21 दिनों से भूख हड़ताल पर थे और स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस होने की संभावना है।
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