प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारतीय नौसेना को तीन अत्याधुनिक स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म—आईएनएस अग्रय, आईएनएस संशोधक और आईएनएस दुनागिरि—समर्पित किए। इन युद्धपोतों के औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल होने के बाद वे पूरी तरह से परिचालन क्षमता के साथ भारतीय नौसेना के बेड़े का हिस्सा बन गए हैं। इससे भारत की समुद्री सुरक्षा और सामरिक क्षमता को महत्वपूर्ण मजबूती मिलेगी।
आईएनएस संशोधक एक अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण पोत है। इसे समुद्र की सतह और समुद्र तल का विस्तृत मानचित्र तैयार करने, सुरक्षित नौवहन मार्गों की पहचान करने और समुद्री आंकड़े जुटाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह जहाज समुद्री अभियानों के लिए महत्वपूर्ण महासागरीय जानकारी भी उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा आपदा राहत और मानवीय सहायता अभियानों के दौरान यह एक तैरते हुए चिकित्सा सहायता केंद्र के रूप में भी कार्य कर सकेगा।
आईएनएस अग्रय उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए विकसित किया गया विशेष युद्धपोत है। यह दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, उनका पीछा करने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम है। इसमें आधुनिक सोनार प्रणाली, पनडुब्बी रोधी रॉकेट, टॉरपीडो और 30 मिमी नौसैनिक तोप लगी हुई है। इसके अलावा यह समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की क्षमता भी रखता है।
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आईएनएस दुनागिरि परियोजना 17ए के तहत विकसित नीलगिरि श्रेणी का अत्याधुनिक स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। यह ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, टॉरपीडो और अन्य आधुनिक हथियारों से लैस है। यह वायु रक्षा, सतही युद्ध और पनडुब्बी रोधी अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है।
तीनों युद्धपोतों का निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा किया गया है। यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में भारत की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।
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