नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत बहुपक्षीय संस्थानों में मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप सुधार किए जाने चाहिए।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, एंटोनियो गुटेरेस ने ब्रिक्स की चौथी बार अध्यक्षता संभालने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी। बैठक में दुनिया में जारी संघर्षों, नौवहन की स्वतंत्रता, सतत विकास, मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवीकरणीय ऊर्जा में प्रगति और वैश्विक खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी ने गुटेरेस को उनके कार्यकाल के शेष समय के लिए शुभकामनाएं दीं। वैश्विक संस्थाओं में सुधार को लेकर हुई यह चर्चा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब भारत अंतरराष्ट्रीय निर्णय लेने वाली संस्थाओं में अपनी भूमिका बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
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भारत ने जुलाई में 2028-29 कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के रूप में चुनाव लड़ने के अपने अभियान की औपचारिक शुरुआत की थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत की उम्मीदवारी पेश करते हुए शांति स्थापना और बहुपक्षवाद के प्रति देश की प्रतिबद्धता पर जोर दिया था।
भारत की अध्यक्षता में इस वर्ष ब्रिक्स का मुख्य विषय “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” रखा गया है। विकास, सततता और नवाचार सम्मेलन के प्रमुख केंद्र हैं।
ब्रिक्स प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग और वैश्विक दक्षिण के हितों को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। इसके एजेंडे में विकास, वित्त, तकनीक, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क शामिल हैं।
वर्तमान में ब्रिक्स में 11 देश शामिल हैं—ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात। भारत की अध्यक्षता ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया आर्थिक विखंडन, तकनीकी बदलाव, भू-राजनीतिक अनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन और संसाधनों से जुड़े दबावों का सामना कर रही है। ऐसे में ब्रिक्स के जरिए वैश्विक संस्थाओं में सुधार और विकास सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
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