दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू ने राजधानी के अस्पतालों में भर्ती होने वाले सभी मरीजों की क्षय रोग (टीबी) जांच करने का प्रस्ताव दिया है। प्रस्ताव के तहत मरीज किसी भी बीमारी के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती हो, उसकी टीबी स्क्रीनिंग भी की जाएगी। हालांकि, जांच मरीज या उसके परिवार की सहमति से ही होगी।
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब दिल्ली टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत निर्धारित कई महत्वपूर्ण लक्ष्यों से पीछे चल रही है और 30 सितंबर की समयसीमा नजदीक है।
वर्तमान में पात्र घरेलू संपर्कों के बीच टीबी निवारक उपचार (टीपीटी) की कवरेज 55 प्रतिशत है, जबकि लक्ष्य 80 प्रतिशत रखा गया है। वहीं, डिफरेंशिएटेड टीबी केयर की उपलब्धि 74 प्रतिशत है, जबकि निर्धारित लक्ष्य 90 प्रतिशत है। उपराज्यपाल ने अधिकारियों को 30 सितंबर तक दोनों लक्ष्यों को पूरा करने और अभियान की प्रगति में बाधा डालने वाली संचालन संबंधी कमियों को दूर करने के निर्देश दिए हैं।
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उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में बढ़ेगी जांच
उपराज्यपाल ने उच्च जोखिम वाले वार्डों और ऐसे स्थानों, जहां बड़ी संख्या में लोग एक साथ रहते हैं, वहां टीबी जांच तेज करने को कहा है। अधिकारियों को सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से जागरूकता अभियान बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि टीबी को लेकर लोगों के बीच मौजूद डर और सामाजिक कलंक को कम किया जा सके तथा अधिक लोग जांच के लिए आगे आएं।
टीबी की जांच के लिए उपलब्ध कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों के व्यापक इस्तेमाल में रेडियोग्राफरों की कमी बाधा बन रही है। उपराज्यपाल ने इस मानव संसाधन की कमी को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए हैं, ताकि उपलब्ध उपकरणों का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जा सके।
लंबित डीबीटी भुगतान जल्द जारी करने के निर्देश
संधू ने पात्र लाभार्थियों को दिए जाने वाले लंबित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) भुगतान को भी बिना देरी जारी करने के निर्देश दिए हैं।
यह दिल्ली के टीबी कार्यक्रम की उपराज्यपाल द्वारा की गई दूसरी समीक्षा थी। इससे पहले 23 जून को पहली समीक्षा बैठक हुई थी। अब 30 सितंबर की समयसीमा को देखते हुए अधिकारियों से टीबी जांच बढ़ाने और निवारक उपचार तथा बेहतर देखभाल से जुड़े लक्ष्यों की कमी को पूरा करने को कहा गया है।
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