प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने मंगलवार को अल नीनो के संभावित प्रभावों का आकलन करने और इससे निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की। बैठक में देश में मानसून की स्थिति, वर्षा की संभावनाओं और विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की शुरुआत में भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अधिकारियों ने जून महीने और 7 जुलाई तक हुई बारिश की स्थिति के बारे में जानकारी दी। मौसम विभाग के महानिदेशक ने देश में मानसून की प्रगति, इसके विस्तार और अल नीनो के संभावित प्रभावों को लेकर प्रस्तुति दी।
अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष मानसून के आगमन में कुछ देरी हुई है। बैठक में इस बात पर भी चर्चा की गई कि अल नीनो की स्थिति का कृषि, जल संसाधन, ऊर्जा, स्वास्थ्य और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर क्या असर पड़ सकता है।
और पढ़ें: प्रशांत महासागर में शक्तिशाली अल नीनो का संकेत, भारत समेत दुनिया पर पड़ेगा असर
पीएमओ की बैठक में संबंधित मंत्रालयों और विभागों के अधिकारियों ने संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी तैयारियों की जानकारी दी। सरकार ने मौसम में बदलाव और संभावित कम बारिश की स्थिति को देखते हुए पहले से योजना बनाने पर जोर दिया।
अल नीनो एक जलवायु घटना है, जिसके कारण प्रशांत महासागर के समुद्री सतह के तापमान में वृद्धि होती है और इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ता है। भारत में इसका प्रभाव अक्सर मानसून की बारिश और कृषि उत्पादन से जोड़कर देखा जाता है।
बैठक में किसानों, जल प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में आवश्यक कदम उठाने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे मौसम संबंधी पूर्वानुमानों पर लगातार नजर रखें और जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई करें।
सरकार का उद्देश्य बदलती मौसमी परिस्थितियों के बीच देश के प्रमुख क्षेत्रों को सुरक्षित रखना और संभावित चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटना है। पीएमओ ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
और पढ़ें: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अल-नीनो चुनौती से निपटने के लिए उच्च स्तरीय बैठक की