केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शुक्रवार को कर्नाटक पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कथित तौर पर अनुमति नहीं मिलने के बावजूद मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों द्वारा बेंगलुरु स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना दिए जाने को लेकर पुलिस से जवाब मांगा।
प्रह्लाद जोशी ने सवाल किया कि जब मुख्यमंत्री और उनके कैबिनेट सहयोगियों को मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना देने की अनुमति नहीं मिली थी, तो पुलिस ने उन्हें वहां प्रदर्शन करने की अनुमति कैसे दी। उन्होंने कर्नाटक पुलिस से इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब कर्नाटक में चुनावी प्रक्रिया और उससे जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों का मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना देना इसी राजनीतिक घटनाक्रम का हिस्सा रहा।
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केंद्रीय मंत्री के सवाल का केंद्र प्रदर्शन के लिए अनुमति और कानून-व्यवस्था से जुड़ा है। उनका कहना है कि यदि धरने की अनुमति नहीं थी, तो पुलिस को इस संबंध में कार्रवाई करनी चाहिए थी या प्रदर्शन को रोकना चाहिए था।
मुख्यमंत्री और उनके सहयोगियों के धरने को लेकर राज्य की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर हुए इस प्रदर्शन ने चुनावी प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच जारी मतभेदों को भी सामने ला दिया है।
प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक पुलिस से यह स्पष्ट करने को कहा है कि बिना अनुमति के कथित तौर पर धरना आयोजित किए जाने की स्थिति में पुलिस की भूमिका क्या रही। इस मुद्दे पर आगे राजनीतिक प्रतिक्रिया आने की संभावना है।
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