रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार ने कहा है कि भारत में मजबूत ड्रोन निर्माण प्रणाली विकसित करने के लिए निजी क्षेत्र सबसे अधिक सक्षम और बेहतर तरीके से संगठित है। उन्होंने कहा कि आधुनिक रक्षा तकनीक के क्षेत्र में निजी कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं और देश को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
संजीव कुमार ने कहा कि ड्रोन तकनीक भविष्य की रक्षा और सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में भारत को अपनी घरेलू निर्माण क्षमता मजबूत करनी होगी, ताकि विदेशी आयात पर निर्भरता कम की जा सके।
उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में नवाचार, तकनीकी दक्षता और तेज निर्णय लेने की क्षमता अधिक होती है, जिससे ड्रोन निर्माण जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में तेजी से प्रगति संभव हो पाती है।
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रक्षा उत्पादन सचिव ने यह भी कहा कि सरकार ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। इससे देश में रक्षा उपकरणों और उन्नत तकनीकों के निर्माण को बढ़ावा मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत में ड्रोन का इस्तेमाल केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि, आपदा प्रबंधन, निगरानी, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक कार्यों में भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक ड्रोन निर्माण बाजार में बड़ी भूमिका निभा सकता है। इसके लिए सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर सहयोग जरूरी होगा।
संजीव कुमार ने उद्योग जगत से अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) में निवेश बढ़ाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि यदि देश को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है तो स्वदेशी नवाचार और निर्माण पर जोर देना होगा।
सरकार का लक्ष्य भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनाना है और ड्रोन निर्माण इस दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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