पंजाब में इस सप्ताह एक बड़े राजनीतिक टकराव के संकेत मिल रहे हैं, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस केंद्र सरकार के एक अहम फैसले को लेकर आमने-सामने आ गई हैं। केंद्र ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G अधिनियम, 2025 लागू करने का निर्णय लिया है। इसी फैसले को लेकर दोनों दल राज्यभर में अलग-अलग अभियान शुरू करने जा रहे हैं।
BJP इस नए कानून के समर्थन में 7 जनवरी 2026 से एक राज्यव्यापी जागरूकता अभियान शुरू करेगी। पार्टी का कहना है कि वह लोगों को कांग्रेस द्वारा फैलाए जा रहे “भ्रामक प्रचार” की सच्चाई बताएगी और नए अधिनियम के फायदों को जनता तक पहुंचाएगी। BJP नेताओं के अनुसार, नया कानून ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अधिक अवसर पैदा करेगा तथा विकासोन्मुखी भारत के लक्ष्य को मजबूती देगा।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने केंद्र के इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए ‘सेव मनरेगा’ नाम से राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन 8 जनवरी 2026 से गुरदासपुर से शुरू होगा। पार्टी का आरोप है कि मनरेगा गरीबों और ग्रामीण मजदूरों के लिए एक सुरक्षा कवच रहा है और इसे खत्म करना या बदलना लाखों लोगों की आजीविका पर सीधा हमला है।
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कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मनरेगा ने ग्रामीण भारत में रोजगार, पारदर्शिता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की है, जबकि नया कानून इन गारंटियों को कमजोर कर सकता है। पार्टी ने इस मुद्दे पर सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति बनाई है।
इस तरह, नई ग्रामीण रोजगार योजना को लेकर पंजाब में BJP और कांग्रेस के बीच सियासी संघर्ष तेज होने वाला है, जिसका असर आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति पर साफ दिखाई देगा।
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