पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सोमवार को हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करते हुए एक वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा दायर याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें राज्य की अभियोजन सेवा नियमों में हाल ही में किए गए संशोधनों को चुनौती दी गई है।
इस याचिका को डिवीजन बेंच, जिसमें न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर शामिल थे, ने स्वीकार किया और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अपनी दलील पेश करे।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि राज्य ने एक अलग और “भेदभावपूर्ण” वर्ग बनाकर उन अधिवक्ताओं के अधिकारों को छीन लिया है जिनके पास 15 वर्ष का अनुभव है। उनका कहना है कि नियमों में किए गए संशोधन निजी अधिवक्ताओं के साथ भेदभाव करते हैं और केंद्रीय कानून द्वारा वरिष्ठ पदों के लिए निर्धारित पात्रता मानदंड का उल्लंघन करते हैं।
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याचिकाकर्ता प्रदीप कुमार राप्रिया हैं, जो 18 वर्षों से अधिक अनुभव के साथ अभ्यासरत वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। उन्होंने पहले भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में मामलों में पेश होकर अनुभव प्राप्त किया है। इसके अलावा, वे राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ कानून अधिकारी के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
अधिवक्ता ने अदालत में तर्क दिया कि राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नए नियमों से अनुभवी अधिवक्ताओं के करियर और वरिष्ठ पदों तक पहुंच पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
अब हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से याचिका पर प्रतिक्रिया मांगी है और इसके बाद ही अगली सुनवाई की तारीख तय की जाएगी।
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