कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि संसद में उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया, इसलिए वह छात्रों पर हुई कथित कार्रवाई के मुद्दे पर मीडिया के सामने अपनी बात रख रहे हैं।
इससे पहले लोकसभा और राज्यसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया गया। विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने लोकसभा में अपनी बात रखी और आरोप लगाया कि हाल ही में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान उनके साथ बर्बरता की गई।
छात्रों पर कार्रवाई के लिए अमित शाह जिम्मेदार: राहुल गांधी
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों पर पैलेट गन और बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने घायल छात्रों के एम्स मेडिकल प्रमाण पत्र देखे हैं। राहुल गांधी ने दावा किया कि छात्रों पर हुई लाठीचार्ज और गोलीबारी जैसी कार्रवाई के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जिम्मेदार हैं।
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राहुल गांधी ने कहा कि संसद में उन्हें बार-बार रोका गया और बोलने नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि छात्रों के मुद्दे को उठाना जरूरी है क्योंकि यह देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा मामला है।
सोशल मीडिया पर भी सरकार पर निशाना
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि संसद में अपने भाषण के दौरान उन्होंने दिल्ली में छात्रों पर हुई कार्रवाई का मुद्दा उठाया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों का नाम लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सांसदों ने उन्हें बोलने नहीं दिया।
उन्होंने कहा, "माइक बंद किया जा सकता है, लेकिन छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।"
युवाओं के प्रदर्शन की सराहना
लोकसभा में चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने हालिया नीट-यूजी 2026 परीक्षा परिणाम लीक विवाद को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने अपने भविष्य के लिए जो आवाज उठाई है, उस पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि छात्रों का आंदोलन उनकी चिंताओं और आकांक्षाओं को दिखाता है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है और इसका व्यवसायीकरण बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि एक परीक्षा की तैयारी और उससे जुड़े खर्च कई बार सरकार के पूरे शिक्षा बजट जितने हो जाते हैं। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा की मांग की।
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