कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने लगातार दूसरे वर्ष लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में हिस्सा नहीं लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया, लेकिन कांग्रेस के दोनों प्रमुख नेता समारोह में मौजूद नहीं थे।
खड़गे और राहुल गांधी की अनुपस्थिति ऐसे समय में हुई है, जब केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच संबंधों में तनाव बना हुआ है। हाल ही में समाप्त हुए संसद के मानसून सत्र के दौरान भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस और टकराव देखने को मिला था।
लगातार दूसरी बार समारोह से दूरी
खड़गे और राहुल गांधी ने इस वर्ष भी प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में भाग नहीं लिया। पिछले वर्ष भी दोनों नेता समारोह में अनुपस्थित रहे थे।
और पढ़ें: इटली के साथ मजबूत रिश्तों पर सरकार का जोर, कांग्रेस की मेलोनी टिप्पणी पर विदेश मंत्रालय ने जताई आपत्ति
2024 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में राहुल गांधी की बैठने की व्यवस्था को लेकर विवाद हुआ था। उस समय लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लाल किले के कार्यक्रम में पीछे की पंक्तियों में बैठाया गया था। विपक्ष ने इसे कांग्रेस नेता और देश की जनता का अपमान बताया था। हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि कार्यक्रम में ओलंपिक खिलाड़ियों को स्थान देने के कारण बैठने की व्यवस्था में बदलाव किया गया था।
प्रोटोकॉल के अनुसार, लोकसभा में विपक्ष के नेता को आमतौर पर ऐसे महत्वपूर्ण सरकारी समारोहों में अग्रिम पंक्ति में स्थान दिया जाता है।
मानसून सत्र में भी बढ़ा टकराव
संसद के हालिया मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच संबंधों में और तनाव देखने को मिला। सत्र में सदन की कार्यवाही और उत्पादकता को लेकर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए। सत्र की शुरुआत 20 जुलाई को हुई थी।
सत्र के दौरान 12 विधेयक पारित किए गए, जबकि पेपर लीक से संबंधित कानून पर ही विस्तृत चर्चा हो सकी। सत्र समाप्त होने के बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा आयोजित पारंपरिक चाय समारोह का भी बहिष्कार किया।
पीएम मोदी के भाषण में विकसित भारत पर जोर
लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी ने 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य पर जोर दिया। उन्होंने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की अपील की और नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने विनिर्माण, कृषि, तकनीक, गतिशक्ति, रक्षा, हरित अर्थव्यवस्था और भारत की सॉफ्ट पावर को विकास की प्रमुख धाराओं के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने माओवादी विचारधारा और ‘दिमागी नक्सलियों’ का भी उल्लेख किया।
और पढ़ें: राजनाथ सिंह का राहुल गांधी पर हमला, बोले- महान नेताओं की विरासत का दावा कैसे कर सकती है कांग्रेस?