प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ऐसे शब्दों का इस्तेमाल उन लोगों को शर्मिंदा करने, बदनाम करने और चुप कराने के लिए करती है, जो सरकार से जवाबदेही मांगते हैं।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के 15 अगस्त के लाल किले से दिए भाषण का जवाब दिया। उन्होंने ‘टीआईएनए’ हैशटैग का इस्तेमाल किया और इसका अर्थ “देयर इज नो अकाउंटेबिलिटी” यानी “कोई जवाबदेही नहीं है” बताया। इससे पहले प्रधानमंत्री के समर्थकों द्वारा टीआईएनए का अर्थ “देयर इज नो अल्टरनेटिव” यानी “कोई विकल्प नहीं है” बताया जाता रहा है।
मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए ऐसे लोगों को अलग-थलग करने की बात कही थी। इसके बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच इस टिप्पणी को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी चल रही है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार पर सवाल उठाने वालों को ‘दिमागी नक्सल’ कहकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
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राहुल गांधी ने दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुई हालिया त्रासदी का जिक्र किया, जिसमें सात लोगों की मौत हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अक्सर निचले स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराकर वास्तविक दोषियों को बच निकलने देती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाती।
उन्होंने कहा कि पिछले चार महीनों में राजधानी में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं। उनके मुताबिक, सैदुलाजाब में इसी तरह की त्रासदी में छह लोगों की मौत हुई, जबकि हौज रानी में आग लगने से 22 लोगों की जान चली गई।
राहुल गांधी ने कहा कि हर बार मलबे में लोगों की जान, सपने और आकांक्षाएं दब जाती हैं, लेकिन वास्तविक कार्रवाई दिखाई नहीं देती। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कोई जवाबदेही मांगता है तो प्रधानमंत्री की ओर से ‘दिमागी नक्सल’ और ‘नाराज फूफा’ जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।
रायबरेली से लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली में ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार है, इसलिए घटना की जवाबदेही से बचने का कोई बहाना नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि समस्या इच्छाशक्ति की कमी से पैदा होती है और जहां इच्छाशक्ति नहीं होती, वहां जवाबदेही भी नहीं होती।
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