नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य विपक्षी नेताओं को कुछ समय बाद रिहा कर दिया गया। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग भी दिल्ली पुलिस की हिरासत में लिए जाने के बाद रिहा कर दिए गए।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, करीब 250 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें लगभग 50 सांसद शामिल थे। पुलिस ने बताया कि उसे सोशल मीडिया के जरिए जानकारी मिली थी कि इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) के नेता संसद भवन से चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकालेंगे। पुलिस के मुताबिक, इस मार्च की अनुमति के लिए नई दिल्ली जिले के पुलिस उपायुक्त कार्यालय में कोई आवेदन नहीं दिया गया था, इसलिए अनुमति भी नहीं दी गई।
प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी विपक्षी नेताओं के साथ सबसे आगे रहे। उन्होंने संसद मार्ग पर बैरिकेड पर चढ़कर तिरंगा लहराया और पुलिस घेरा पार करते हुए ऑल इंडिया रेडियो परिसर में प्रवेश किया। वह कई घंटे तक परिसर में रहे।
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राहुल गांधी ने कहा कि वह केवल मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलना चाहते हैं और उन्हें बताना चाहते हैं कि उन्होंने कथित तौर पर ‘वोट चोरी’ की है। उन्होंने कहा कि वह अपनी मांग पूरी होने तक वहीं बैठे रह सकते हैं।
यह प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर विपक्ष के आरोपों के बीच हुआ। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि किसी राजनीतिक दल ने बैठक के लिए औपचारिक अनुरोध नहीं किया है।
प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ'ब्रायन तथा माकपा सांसद जॉन ब्रिटास समेत कई नेता शामिल हुए। उन्हें भी हिरासत में लेकर बाद में रिहा कर दिया गया।
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष अपनी मांगें पूरी होने तक पीछे नहीं हटेगा। इस बीच, बीजू जनता दल के सांसदों ने भी मार्च में हिस्सा लिया। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसके लिए नवीन पटनायक का आभार जताया।
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