भारतीय रेलवे ने हाल ही में लागू किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप पिछले चार महीनों में सीमेंट का परिवहन 170 प्रतिशत बढ़ा दिया है। यह सुधार सड़क परिवहन से रेलवे आधारित परिवहन की ओर रुझान बढ़ाने और अधिक साफ-सुथरे तथा कुशल लॉजिस्टिक विकल्प को बढ़ावा देने के लिए किए गए हैं।
रेलवे ने कस्टमाइज्ड टैंक कंटेनर और बल्क सीमेंट टर्मिनल नीति को लागू किया, जिससे मल्टी-मोडल परिवहन को बढ़ावा मिला और भारी मात्रा में सीमेंट के परिवहन की प्रक्रिया तेज और सुरक्षित हुई। इसके परिणामस्वरूप रेलवे ने न केवल समय पर वितरण सुनिश्चित किया, बल्कि ईंधन लागत और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाई।
अब रेलवे का ध्यान फ्लाई ऐश मार्केट पर है, जो निर्माण उद्योग में तेजी से बढ़ रहा है। फ्लाई ऐश एक सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प है, और रेलवे इसे बड़े पैमाने पर ट्रांसपोर्ट करके बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना बना रहा है।
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रेलवे के अधिकारियों ने कहा कि ये कदम न केवल उद्योग के लिए लाभकारी हैं, बल्कि रेलवे के राजस्व में भी इजाफा करेंगे। इन सुधारों के माध्यम से रेलवे ने लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाई है और उद्योग को अधिक भरोसेमंद और टिकाऊ परिवहन समाधान प्रदान किया है।
सुधारों के तहत रेलवे ने बड़े उद्योगों और निर्माण कंपनियों के साथ समन्वय बढ़ाया है, ताकि समय पर डिलीवरी सुनिश्चित हो और लॉजिस्टिक लागत घटे। इससे रेलवे और उद्योग दोनों को आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ मिलेगा।
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