राजस्थान के पश्चिमी जिले पाली स्थित जवई लेपर्ड रिजर्व में अब नाइट सफारी, ड्रोन और स्पॉटलाइट जैसी गतिविधियाँ प्रतिबंधित कर दी गई हैं। यह निर्णय राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनाया, जबकि मामले की सुनवाई पाली निवासी अपूर्व अग्रवाल द्वारा दायर पीआईएल पर की गई।
न्यायमूर्ति संदीप शाह और न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी की बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अब से कोई भी सफारी गतिविधि, जिसमें नाइट सफारी या जंगली जानवरों को ढूंढने या देखने का प्रयास शामिल हो, केवल सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक ही की जा सकेगी। अदालत ने यह समय सीमा रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के नियमों के अनुरूप निर्धारित की।
साथ ही, अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति टॉर्च, सर्च लाइट, स्पॉटलाइट, ड्रोन या अन्य किसी उपकरण का उपयोग कर जानवरों को परेशान करता पाया जाता है, तो राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को उचित रोकथाम और लागू करने वाले उपाय करके इसे रोका जाएगा।
और पढ़ें: पीएम मोदी ने 16,000 करोड़ रुपये के परियोजनाओं का उद्घाटन किया, HPV टीकाकरण अभियान शुरू किया, 21,863 रोजगार पत्र वितरित किए
अदालत ने यह भी माना कि जवई क्षेत्र, अपनी जैविक विशिष्टता और अंतरराष्ट्रीय मान्यता के बावजूद, अभी भी किसी आधिकारिक वाइल्डलाइफ सेंचुरी या राष्ट्रीय उद्यान के संरक्षणात्मक ढांचे के बाहर है। इसलिए इस तरह के प्रतिबंध से जानवरों और उनके आवास की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
इस निर्णय से जवई लेपर्ड रिजर्व में पर्यटन गतिविधियों को नियंत्रित करने और वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने में मदद मिलेगी। अब पर्यटक केवल निर्धारित समय में ही सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से रिजर्व का अनुभव कर सकेंगे।
और पढ़ें: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शिक्षक की निलंबन पर लगाई रोक