गुजरात के राजकोट एयरपोर्ट पर बुधवार को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने वार्षिक एंटी-हाइजैकिंग मॉक एक्सरसाइज (एएचएमई) का आयोजन किया। इस अभ्यास का उद्देश्य विमान अपहरण जैसी आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों की तैयारियों और प्रतिक्रिया क्षमता का आकलन करना था।
अधिकारियों के अनुसार, इस मॉक ड्रिल के दौरान एक काल्पनिक विमान अपहरण की स्थिति तैयार की गई, जिसमें सुरक्षा बलों और संबंधित एजेंसियों ने अपनी भूमिका निभाई। अभ्यास के माध्यम से यह जांच की गई कि ऐसी गंभीर स्थिति में सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से कार्रवाई कर सकते हैं।
सीआईएसएफ के जवानों के अलावा एयरपोर्ट प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों ने भी इस अभ्यास में भाग लिया। मॉक ड्रिल के दौरान आपात प्रतिक्रिया प्रणाली, यात्रियों की सुरक्षा, संदिग्ध स्थिति से निपटने और बचाव अभियानों की प्रक्रिया का परीक्षण किया गया।
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सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के अभ्यास नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे के समय सुरक्षा बल पूरी तरह तैयार रहें। विमानन क्षेत्र में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एजेंसियां अपनी कार्यप्रणाली और समन्वय को लगातार बेहतर बनाने का प्रयास करती हैं।
राजकोट एयरपोर्ट पर आयोजित इस अभ्यास के दौरान सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की गई और सामने आई कमियों को दूर करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की मॉक ड्रिल वास्तविक आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
सीआईएसएफ देश के प्रमुख हवाई अड्डों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है और समय-समय पर ऐसे अभ्यासों के जरिए अपनी तैयारियों को मजबूत करता रहता है। राजकोट एयरपोर्ट पर आयोजित यह अभ्यास भी इसी सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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