रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवादी संगठनों को समर्थन, प्रशिक्षण या आर्थिक मदद देने वाले देशों के खिलाफ वैश्विक समुदाय से ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने का आह्वान किया है। बुधवार को फिलीपींस के सेबू में अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सख्त और अडिग रुख बनाए रखने पर जोर दिया।
दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका के 10 वर्षीय रक्षा सहयोग ढांचे की प्रगति की समीक्षा की। इस समझौते का उद्देश्य सैन्य तकनीक, सूचना साझा करने और रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन में सहयोग बढ़ाना है। यह ढांचा पिछले साल अक्टूबर में दोनों देशों के बीच हुआ था।
आतंकवाद के खिलाफ भारत को अमेरिकी समर्थन
भारतीय पक्ष की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, हेगसेथ ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में अमेरिका के अटूट समर्थन और एकजुटता को दोहराया। राजनाथ सिंह ने अमेरिकी समर्थन के लिए भारत की गहरी सराहना व्यक्त की।
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बैठक में दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और तेजी से बदलते क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी चर्चा की। दोनों देशों के रक्षा संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ सैन्य तैयारियों, तकनीकी सहयोग और रक्षा उद्योग के एकीकरण को आगे बढ़ाने पर विचार किया गया।
बातचीत को बताया ‘उत्कृष्ट’
राजनाथ सिंह ने अपनी बातचीत को ‘उत्कृष्ट’ बताया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने 10 वर्षीय रक्षा ढांचे की प्रगति की समीक्षा की। उनके मुताबिक, सैन्य तकनीक, सूचना साझा करने और संयुक्त उत्पादन में रणनीतिक तालमेल बढ़ाना दोनों देशों की प्राथमिकता है। उन्होंने मजबूत भारत-अमेरिका साझेदारी को स्वतंत्र, खुले और सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र का महत्वपूर्ण आधार बताया।
हेगसेथ ने भी बैठक को सकारात्मक बताते हुए कहा कि दोनों देशों ने प्रमुख रक्षा साझेदारी के एक वर्ष पूरे होने का उल्लेख किया और सहयोग मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
रक्षा सहयोग को गति देने पर सहमति
भारतीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने सुरक्षा समझौतों में हुई प्रगति पर संतोष जताया। सैन्य आदान-प्रदान, समुद्री सुरक्षा सहयोग और मजबूत रक्षा आपूर्ति शृंखला विकसित करने पर भी बातचीत हुई।
अमेरिकी पक्ष ने हालिया द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास’ का उल्लेख किया। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय साझा हितों के समर्थन में रक्षा साझेदारी को और विस्तार देने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेता आसियान देशों और उनके संवाद साझेदारों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए सेबू में मौजूद हैं।
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