महिला आरक्षण विधेयक को लोकसभा में पारित न किए जाने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए “अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण दिन” बताया। उन्होंने कहा कि इस मतदान के जरिए विपक्ष ने अपने “महिला विरोधी चरित्र” को उजागर कर दिया है।
लोकसभा में पेश किए गए संविधान (131वां संशोधन) विधेयक का उद्देश्य महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देना था। हालांकि, यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और गिर गया। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए।
राजनाथ सिंह ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का यह ऐतिहासिक अवसर था, जिसे विपक्ष ने नकार दिया। उनके अनुसार, यह कदम न केवल महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ है, बल्कि देश की प्रगति में भी बाधा डालने वाला है। उन्होंने विपक्षी गठबंधन पर आरोप लगाया कि उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए इस महत्वपूर्ण विधेयक का विरोध किया।
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वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि इसे परिसीमन (डिलिमिटेशन) प्रक्रिया से जोड़ने का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इससे राज्यों के बीच असंतुलन पैदा हो सकता है और प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद संसद में राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गहराने की संभावना है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं।
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