तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में जारी आंतरिक कलह अब राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली तक पहुंच गई है, जिससे पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की राजनीतिक मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं। सोमवार को जहां ममता बनर्जी INDIA गठबंधन की अहम बैठक में शामिल हुईं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर बगावत के संकेत और तेज हो गए।
संकट तब और गहरा गया जब टीएमसी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने अचानक अपने पद से इस्तीफा देते हुए पार्टी छोड़ दी। अपने इस्तीफे में उन्होंने पार्टी के भीतर कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और दावा किया कि वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जनता का जनादेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में था।
सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे के तुरंत बाद 11 अन्य सांसदों ने दिल्ली स्थित उनके आवास पर उनसे मुलाकात की। इसके बाद इन सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से भी मुलाकात की। इन बैठकों के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि कई टीएमसी सांसद भाजपा का दामन थाम सकते हैं।
और पढ़ें: TMC में गहराया संकट, 20 से अधिक सांसदों ने ओम बिरला को लिखा पत्र; अलग पार्टी बनाने की अटकलें तेज
वर्तमान में टीएमसी के लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। ऐसे में किसी भी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का पार्टी की संसदीय ताकत पर सीधा असर पड़ सकता है।
संसद में यह बगावत ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी पार्टी को विद्रोह का सामना करना पड़ रहा है। 294 सदस्यीय विधानसभा में 57 विधायकों ने निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी का समर्थन किया है, जिन्हें विपक्ष का नेता घोषित किया गया है।
गौरतलब है कि संसद और विधानसभा दोनों जगह असंतुष्ट नेताओं ने ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पार्टी की कार्यप्रणाली और निर्णयों के कारण संगठन का जनाधार कमजोर हुआ है, जिससे पश्चिम बंगाल में पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा।
और पढ़ें: ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं, काकोली घोष दस्तिदार और शताब्दी रॉय समेत कई टीएमसी सांसदों ने भूपेंद्र यादव से की मुलाकात