नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि यह दिन भारत के राष्ट्रीय ध्वज, संविधानिक मूल्यों और देश की प्राचीन एवं शाश्वत आध्यात्मिक चेतना की रक्षा और संवर्धन के संकल्प को दोहराने का अवसर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की आत्मा उसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं में निहित है, जिन्हें संविधानिक व्यवस्था के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
दिल्ली स्थित आरएसएस कार्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद अपने संदेश में होसबाले ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में भारत के शाश्वत आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि नागरिकों को न केवल अपने अधिकारों के प्रति सजग रहना चाहिए, बल्कि अपने नागरिक और राष्ट्रीय कर्तव्यों का भी पूरी निष्ठा से पालन करना चाहिए।
आरएसएस के द्वितीय प्रमुख ने समाज में प्रेम, करुणा और आपसी सद्भाव के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि एक मजबूत गणराज्य की नींव सामाजिक संवेदनशीलता पर टिकी होती है। उन्होंने विशेष रूप से समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के प्रति स्नेह, सहानुभूति और सहयोग की भावना विकसित करने की अपील की।
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होसबाले ने कहा कि जरूरतमंदों की सेवा और उनके कल्याण के लिए समर्पित भाव से किया गया कार्य ही वास्तव में भारत गणराज्य की रक्षा करता है। उन्होंने नागरिकों से समाज सेवा को अपना दायित्व मानते हुए राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और संविधानिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
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