भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मतदान केंद्रों पर फिंगर और आइरिस आधारित बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली लागू करने की मांग वाली याचिका पर चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और राज्यों को नोटिस जारी किया है। यह याचिका भारतीय जनता पार्टी के नेता और अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई थी।
यह नोटिस मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने जारी किया। हालांकि, अदालत ने साफ किया कि इस मांग को फिलहाल चल रहे विधानसभा चुनावों पर लागू नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यह जांचना जरूरी है कि क्या भविष्य के लोकसभा या विधानसभा चुनावों में इस तरह की बायोमेट्रिक व्यवस्था को लागू किया जा सकता है। शुरुआत में अदालत ने याचिकाकर्ता को चुनाव आयोग के पास जाने की सलाह दी थी, लेकिन बाद में मामले को सुनने पर सहमति जताई।
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याचिका में कहा गया है कि देश में अभी भी फर्जी मतदान, डुप्लिकेट वोटिंग, पैसे और दबाव के जरिए वोट प्रभावित करने जैसी समस्याएं मौजूद हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता प्रभावित होती है।
गौरतलब है कि असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान हो चुका है, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोटिंग होगी। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है। सभी राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
अब सुप्रीम कोर्ट के इस नोटिस के बाद चुनाव प्रणाली में सुधार को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।
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