भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को भारी गिरावट के साथ बंद हुए। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में कूटनीतिक समाधान की उम्मीद कमजोर पड़ने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 492.70 अंक यानी 0.63 प्रतिशत गिरकर 77,235.46 पर बंद हुआ। कारोबार के अंतिम दौर में सेंसेक्स 493.8 अंक तक टूट गया था।
इसी तरह, पचास शेयरों वाला एनएसई निफ्टी लगातार छठे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ 132.75 अंक यानी 0.55 प्रतिशत फिसलकर 24,154.90 पर बंद हुआ। सेंसेक्स में यह लगातार तीसरे दिन की गिरावट रही।
सेंसेक्स के प्रमुख कमजोर शेयरों में एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, भारती एयरटेल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और हिंदुस्तान यूनिलीवर शामिल रहे। वहीं एक्सिस बैंक, पावर ग्रिड, महिंद्रा एंड महिंद्रा और बजाज फाइनेंस बढ़त के साथ बंद हुए।
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वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.17 प्रतिशत बढ़कर 91.02 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार की धारणा पर सबसे बड़ा दबाव बनी हुई हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि और कमजोर वैश्विक संकेतों ने भी भारतीय शेयरों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ाई।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में समाधान की उम्मीद कमजोर होने से मुद्रास्फीति को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है। ऊंची अमेरिकी ब्याज दरों के कारण उभरते बाजारों का आकर्षण भी कम हुआ है।
एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी और जापान का निक्केई-225 गिरावट में बंद हुए, जबकि शंघाई और हांगकांग के बाजार मामूली बढ़त में रहे। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 2,535.10 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।
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