कांग्रेस नेता शशि थरूर ने महिला आरक्षण कानून में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून का इस्तेमाल किसी भी तरह से राजनीतिक हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे संघीय ढांचे और संसद की गरिमा पर असर पड़ सकता है।
शशि थरूर ने आरोप लगाया कि सरकार आगामी राज्य चुनावों को ध्यान में रखते हुए एक विशेष संसदीय सत्र बुला रही है, ताकि इससे राजनीतिक लाभ उठाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया के पीछे 2029 के आम चुनावों से पहले परिसीमन (डिलिमिटेशन) को ध्यान में रखने की रणनीति हो सकती है।
थरूर ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन यह आरक्षण निष्पक्ष और समावेशी होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी प्रकार का संशोधन ऐसा नहीं होना चाहिए जो लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करे या संसद की कार्यक्षमता को प्रभावित करे।
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उन्होंने यह भी कहा कि संसद देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। ऐसे में महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्यापक सहमति और पारदर्शिता जरूरी है।
आगामी तीन दिवसीय विशेष सत्र में महिला आरक्षण कानून में संशोधन पर चर्चा होने की संभावना है। इसको लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और विभिन्न दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
यह मुद्दा आने वाले समय में भारतीय राजनीति का एक प्रमुख विषय बन सकता है, खासकर जब देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
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