तमिलनाडु विधानसभा में मंगलवार, 25 अगस्त को छह अन्नाद्रमुक विधायकों के इस्तीफे का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। शपथ लेने के एक महीने के भीतर ही विधायकों के इस्तीफे से सदन में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। विधानसभा अध्यक्ष जे.सी.डी. प्रभाकर ने कहा कि विधायकों ने अपनी इच्छा से इस्तीफा दिया है और खाली हुई सीटों पर चुनाव कराने का अधिकार केवल भारत निर्वाचन आयोग के पास है।
द्रमुक विधायक एस. ऑस्टिन ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि छह विधानसभा क्षेत्रों के लोगों की आवाज कमजोर हो गई है और उनके मुद्दों को सदन में उठाने वाला कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है। उन्होंने कहा कि मतदाताओं ने काफी मेहनत और उम्मीद के साथ अपने प्रतिनिधियों को चुना था, लेकिन एक महीने के भीतर इस्तीफे से उनकी उम्मीदों को झटका लगा है।
इस्तीफा देने वाले छह अन्नाद्रमुक विधायक हैं—मरगथम कुमारवेल (मदुरांतकम), एस. जयकुमार (पेरुंदुरई), पी. सत्यबामा (धरापुरम), एसक्की सुब्बाया (अंबासमुद्रम), पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सी. विजयभास्कर (विरालिमलाई) और पूर्व परिवहन मंत्री एम.आर. विजयभास्कर (करूर)।
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अध्यक्ष प्रभाकर ने कहा कि इस्तीफे नियमों के अनुसार स्वीकार किए जा चुके हैं और मामला अदालत में लंबित है। उन्होंने कहा कि इन सीटों पर उपचुनाव कराना निर्वाचन आयोग का अधिकार है।
लोक निर्माण विभाग के मंत्री आधव अर्जुन ने कहा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रत्येक जिले के लिए प्रभारी मंत्री नियुक्त किए हैं। ये मंत्री संबंधित क्षेत्रों में पेयजल समेत अन्य बुनियादी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं।
विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि छहों विधायकों ने विधानसभा के एक भी सत्र में हिस्सा नहीं लिया। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने कहा कि किसी विधानसभा क्षेत्र की सभी समस्याओं को एक मंत्री एक दिन में नहीं समझ सकता।
सदन में अन्नाद्रमुक और तमिलगा वेट्री कज़गम सदस्यों के बीच तीखी बहस भी हुई। अध्यक्ष ने पलानीस्वामी से भावुक न होने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की।
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