केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) वित्तीय संकट से जूझ रही विमानन कंपनी स्पाइसजेट की परिचालन और वित्तीय स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता विमानन सुरक्षा सुनिश्चित करना है और इसमें किसी तरह की लापरवाही नहीं होने दी जाएगी।
राम मोहन नायडू ने कहा कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय, डीजीसीए के माध्यम से एयरलाइन के परिचालन और कुछ हद तक वित्तीय मामलों की भी निगरानी कर रहा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मौजूदा आर्थिक चुनौतियों के बीच सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न हो।
सरकार के हस्तक्षेप की सीमा
मंत्री ने कहा कि मंत्रालय स्पाइसजेट के साथ लगातार संपर्क में है और कंपनी की मदद के संभावित रास्तों पर विचार कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्पाइसजेट एक निजी विमानन कंपनी है, इसलिए सरकार के हस्तक्षेप की कुछ सीमाएं हैं।
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नायडू ने बताया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण विमानन क्षेत्र को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। सरकार ने एयरलाइंस को सहायता देने के लिए इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) को भी बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि क्रेडिट गारंटी योजना के तहत स्पाइसजेट को अब तक 150 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। बाकी फंडिंग को एयरलाइन और उसके बैंकिंग साझेदारों के बीच तय किया जाना है, ताकि योजना को आगे लागू किया जा सके।
यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा पर जोर
नायडू ने कहा कि सरकार की तत्काल प्राथमिकता यात्रियों को असुविधा से बचाना, परिचालन में सुरक्षा मानकों को बनाए रखना और एयरलाइन की उड़ान सेवाओं को सुचारू रखना है।
स्पाइसजेट लंबे समय से वित्तीय दबाव, घटते बेड़े और घरेलू विमानन बाजार में कम होती हिस्सेदारी जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया में संघर्ष के बाद विमान ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी, हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में व्यवधान ने विमानन कंपनियों पर अतिरिक्त दबाव डाला है।
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