तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के ‘जबड़े’ वाले इशारे और द्रमुक पर लगाए गए आरोपों को लेकर पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने गुरुवार, 10 सितंबर को पलटवार किया। स्टालिन ने कहा कि कोई उन्हें कितना भी नीचा दिखाने की कोशिश करे, इतिहास को कभी बदला नहीं जा सकता।
विजय ने 7 सितंबर को विधानसभा में विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (द्रमुक) पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उन्होंने करुणानिधि सरकार से जुड़े आरोपों के संदर्भ में सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया था। इस दौरान विजय एक हाथ से अपने जबड़े को ऊपर उठाने जैसा इशारा करते नजर आए थे।
स्टालिन ने द्रमुक के आपातकाल के दौर के संघर्ष को याद किया। उन्होंने बताया कि तत्कालीन द्रमुक प्रमुख एम. करुणानिधि ने मरीना बीच पर बड़ी सभा आयोजित कर मीसा कानून की कड़ी आलोचना की थी। इसके बाद 31 जनवरी 1976 को केंद्र सरकार ने द्रमुक सरकार को बर्खास्त कर दिया था।
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स्टालिन ने कहा कि सरकार बर्खास्त होने के तुरंत बाद पुलिस उनके पिता करुणानिधि के गोपालपुरम स्थित आवास पहुंची, ताकि उन्हें मीसा के तहत गिरफ्तार किया जा सके। उस समय वह घर पर नहीं थे। अगले दिन लौटने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
स्टालिन ने आरोप लगाया कि जेल में उनके साथ गंभीर शारीरिक और मानसिक अत्याचार किया गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें कुष्ठ रोगियों के लिए इस्तेमाल होने वाली जगह पर बंद किया गया था, जहां एक छोटे कमरे में 10 लोगों को रखा गया। उनके अनुसार, कैदियों को लाठियों से पीटा जाता और जूतों से मारा जाता था।
उन्होंने द्रमुक नेता और पूर्व सांसद चिट्टी बाबू की जेल में कथित पिटाई से मौत का भी जिक्र किया और कहा कि उस दौरान उनका अपना जबड़ा भी टूट गया था। स्टालिन ने कहा कि अन्नादुरै के समय से द्रमुक के वैचारिक संघर्ष का यह इतिहास है और इसका हिस्सा होना उनके लिए गर्व की बात है।
स्टालिन ने विजय से विधानसभा में कानून-व्यवस्था, कल्याणकारी योजनाओं, तमिलनाडु के विकास और राज्य के अधिकारों जैसे मुद्दों पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने विजय सरकार पर प्रशासनिक विफलताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को अपनी कमियों को छिपाने के लिए अनावश्यक विवाद खड़े नहीं करने चाहिए।
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