पांच महीने तक चले कठिन संघर्ष के बाद बांग्लादेश से भारत वापस लाई गई 26 वर्षीय सुनाली खातून ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक बेटे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म से परिवार को राहत जरूर मिली है, लेकिन उन्होंने फिलहाल नवजात का नाम नहीं रखने का फैसला किया है। परिवार का कहना है कि वे मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें सुनाली के पति दानिश शेख और एक अन्य बंगाली परिवार—स्वीटी बीबी और उनके दो बच्चों—की बांग्लादेश से वापसी का मुद्दा उठाया जाएगा।
सुनाली को अवैध प्रवासी होने के संदेह में पहले बांग्लादेश धकेल दिया गया था, जहां उन्हें कई महीनों तक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और पश्चिम बंगाल सरकार की मदद से उनकी भारत वापसी संभव हो सकी। अब परिवार को उम्मीद है कि न्यायालय की सुनवाई के बाद उनके पति भी जल्द भारत लौट सकेंगे।
अस्पताल से फोन पर The Indian Witness से बात करते हुए सुनाली की मां ज्योत्सना बीबी ने कहा, “हमें इस बात की तसल्ली है कि बच्चे का जन्म भारत में हुआ, बांग्लादेश में नहीं। अगर वहां जन्म होता तो उसकी नागरिकता को लेकर सवाल खड़े हो सकते थे। सुनाली भी यही चाहती थी कि उसका बच्चा भारत में पैदा हो। इसके लिए हम सुप्रीम कोर्ट और पश्चिम बंगाल सरकार का आभार जताते हैं, जिन्होंने सुनाली और उसके बेटे को वापस लाने में मदद की।”
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परिवार का कहना है कि जब तक दानिश शेख की वापसी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक बच्चे का नाम रखना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि पहचान, नागरिकता और इंसाफ की लड़ाई है। अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और बांग्लादेश में फंसे परिजनों की सुरक्षित वापसी पर टिकी हैं।
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