सुप्रीम कोर्ट ने कथित फर्जी चीनी निवेश ऐप से जुड़े धनशोधन मामले में भूपेश अरोड़ा को मिली जमानत रद्द कर दी है, जबकि रोहित विज की जमानत याचिका खारिज कर दी। यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दायरे में है और धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कार्रवाई की जा रही है।
न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने कहा कि मूल अपराध यानी ‘प्रेडिकेट ऑफेंस’ में समझौता हो जाने मात्र से उससे जुड़ी कथित आपराधिक गतिविधियां स्वतः समाप्त नहीं हो जातीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि समझौता ईडी की धनशोधन जांच या उससे जुड़े कथित अपराध को अपने आप खत्म नहीं कर सकता।
मामले की सुनवाई ‘ईडी बनाम भूपेश अरोड़ा’ के रूप में हुई। ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक और अर्कज कुमार पेश हुए। भूपेश अरोड़ा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता, जबकि रोहित विज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ अग्रवाल ने पैरवी की।
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यह मामला हैदराबाद के साइबर अपराध थाने में 26 जुलाई 2022 को दर्ज एफआईआर से शुरू हुआ था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि ‘लॉक्सम’ नामक ऑनलाइन निवेश ऐप के जरिए उससे 1.16 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई। ऐप कथित तौर पर निवेशकों को अधिक रिटर्न का लालच देता था। मूल मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था।
ईडी के अनुसार, जांच में सामने आया कि ‘लॉक्सम’ के जरिए कथित तौर पर जुटाई गई रकम एक्सिंडाई टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े खातों में जमा की गई। कंपनी के 29 वर्चुअल बैंक खाते और एक भौतिक बैंक खाता होने की बात अदालत के रिकॉर्ड में कही गई है।
ईडी ने आरोप लगाया कि रकम कई खातों से होते हुए रंजन मनीकॉर्प और केडीएस फॉरेक्स तक पहुंचाई गई, जहां कथित तौर पर उसे नकदी और विदेशी मुद्रा में बदला गया। एजेंसी ने रोहित विज और नवनीत कौशिक पर इन संस्थाओं को नियंत्रित करने या संचालित करने का आरोप लगाया है। ये आरोप हैं, जिनका परीक्षण अभी अदालत में होना बाकी है।
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