कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को छह मामलों में अंतरिम जमानत दे दी। अदालत ने उन्हें 20,000 रुपये के जमानती मुचलके पर राहत दी है। इस आदेश के बाद मिलन प्रधान जेल से बाहर रहकर 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव में प्रचार कर सकेंगे। अदालत ने उन्हें 21 अक्टूबर को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि मिलन प्रधान को नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद हिरासत में लिया गया था। अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि राज्य सरकार ने ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया, जिससे यह साबित हो कि 2007 के बाद किसी अन्य अपराध के सिलसिले में प्रधान की तलाश की जा रही थी।
मिलन प्रधान से जुड़े मामले 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से संबंधित हैं। अदालत के समक्ष यह भी कहा गया कि इन घटनाओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने की थी। हाई कोर्ट ने प्रधान को एक राजनीतिक कार्यकर्ता बताते हुए उनकी चुनावी भागीदारी के लिए अंतरिम राहत पर विचार किया।
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इससे पहले सितंबर में हाई कोर्ट की एकल पीठ ने कहा था कि मिलन प्रधान को नंदीग्राम उपचुनाव लड़ने की अनुमति मिलनी चाहिए। हालांकि, बाद में हाई कोर्ट की खंडपीठ ने एक मामले में मिली गिरफ्तारी से सुरक्षा को रद्द करते हुए उन्हें नियमित जमानत की प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया था। इसके बाद उन्होंने फिर अंतरिम जमानत के लिए अदालत का रुख किया।
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होगा, जबकि चुनाव प्रचार 4 अक्टूबर को समाप्त होगा। मिलन प्रधान की जमानत से उन्हें चुनाव प्रचार में सीधे भाग लेने का अवसर मिला है। अदालत के ताजा आदेश के तहत उनकी अंतरिम राहत 21 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगी।
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