सुप्रीम कोर्ट ने शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया द्वारा दायर अंतरिम जमानत याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई है। यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें उन पर ₹540 करोड़ से अधिक की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता की सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंताओं को ध्यान में रखते हुए यह भी संकेत दिया कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें चंडीगढ़ की किसी जेल में स्थानांतरित करने पर विचार किया जा सकता है।
सोमवार (19 जनवरी, 2026) को हुई सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मजीठिया की ओर से पेश दलीलों को सुना, जिनमें उनकी सुरक्षा और हिरासत की परिस्थितियों पर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह अंतरिम जमानत के अनुरोध पर उचित समय पर विचार करेगी और इस दौरान कैदी की सुरक्षा सर्वोपरि है।
बिक्रम सिंह मजीठिया इस समय पटियाला की नाभा जेल में बंद हैं। उन्हें जून 2025 में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, मजीठिया पर आय से अधिक संपत्ति जुटाने का आरोप है, जिसकी कुल राशि ₹540 करोड़ से अधिक बताई जा रही है।
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गौरतलब है कि बिक्रम सिंह मजीठिया पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के साले हैं। उनकी गिरफ्तारी और उसके बाद की न्यायिक प्रक्रिया पंजाब की राजनीति में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का यह रुख अहम माना जा रहा है, क्योंकि अंतरिम जमानत और जेल स्थानांतरण जैसे मुद्दे न केवल आरोपी के अधिकारों से जुड़े हैं, बल्कि न्यायिक पारदर्शिता और निष्पक्षता के सिद्धांतों को भी रेखांकित करते हैं।
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