सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (29 अगस्त 2025) को केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए ‘राम सेतु’ को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने की मांग पर जवाब मांगा है। यह नोटिस पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी की ओर से दायर एक रिट याचिका पर जारी किया गया है।
डॉ. स्वामी ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय को निर्देश देने की मांग की है कि वह इस विषय पर लंबित प्रतिनिधित्वों पर शीघ्र निर्णय ले। उनका कहना है कि राम सेतु केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व भी रखता है।
गौरतलब है कि डॉ. स्वामी ने पहले भी अपने जनहित याचिका (PIL) में राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग उठाई थी। यह याचिका उस विवादास्पद ‘सेतुसमुद्रम शिप चैनल प्रोजेक्ट’ के खिलाफ दायर की गई थी, जिसे यूपीए-1 सरकार के कार्यकाल में शुरू किया गया था। इस परियोजना के तहत रामेश्वरम और श्रीलंका के बीच स्थित शैल-श्रृंखला (राम सेतु) में नौवहन मार्ग बनाने का प्रस्ताव रखा गया था।
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डॉ. स्वामी का कहना है कि यह परियोजना न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगी, बल्कि हिंदू आस्था और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक राम सेतु को भी खतरे में डाल देगी।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से इस मामले पर अपना पक्ष रखने को कहा है और जल्द सुनवाई की संभावना जताई है। अदालत के निर्देश के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख पेश करेगी।
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