तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर राज्यपाल आर.एन. रवि और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की सरकार के बीच टकराव खुलकर सामने आया है। मंगलवार को राज्यपाल आर.एन. रवि ने वर्ष 2026 के पहले विधानसभा सत्र में अपना पारंपरिक अभिभाषण देने से इनकार कर दिया और सदन से बाहर चले गए। इस घटनाक्रम ने राजभवन और डीएमके सरकार के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है।
मंगलवार सुबह 9.30 बजे विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई थी। परंपरा के अनुसार, सत्र के पहले दिन राज्यपाल को सदन को संबोधित करना था। हालांकि, सत्र की शुरुआत में राष्ट्रीय गान के बजाय तमिलनाडु राज्य गीत बजाया गया। इसी बात पर नाराज होकर राज्यपाल रवि ने तमिल में संक्षिप्त अभिवादन के बाद सदन से वॉकआउट कर लिया। यह लगातार दूसरा वर्ष है, जब इसी मुद्दे पर राज्यपाल ने विधानसभा से बाहर निकलने का फैसला किया है।
यह टकराव ऐसे समय में हुआ है, जब राज्य में विधानसभा चुनाव में केवल तीन महीने का समय बचा है। राज्यपाल, जिन्हें केंद्र की भाजपा-नेतृत्व वाली सरकार ने नियुक्त किया है और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की डीएमके सरकार पहले से ही कई मुद्दों पर आमने-सामने रही है। इनमें कानून-व्यवस्था, विधेयकों को मंजूरी देने और संवैधानिक प्रक्रियाओं से जुड़े विवाद शामिल हैं।
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राज्यपाल के सदन छोड़ने के बावजूद तमिलनाडु सरकार ने स्थिति को संभालते हुए कार्यवाही आगे बढ़ाई। विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु ने सदन को बताया कि राज्यपाल को प्रोटोकॉल की पूरी जानकारी पहले ही औपचारिक रूप से दी जा चुकी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने प्रस्ताव रखा कि राज्यपाल का अभिभाषण रिकॉर्ड में लिया जाए, जिसे सदन ने स्वीकार कर लिया।
हालांकि, तकनीकी रूप से राज्यपाल का भाषण रिकॉर्ड का हिस्सा बना दिया गया, लेकिन उनका वॉकआउट राज्य सरकार और राजभवन के बीच जारी टकराव को साफ तौर पर उजागर करता है। इससे पहले भी दोनों पक्षों के बीच कई बार टकराव हो चुका है और विधेयकों की मंजूरी से जुड़े विवाद को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
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