तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। टूटे जनादेश के बीच अब राज्य में “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” भी शुरू हो गई है। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (एआईएडीएमके) ने अपने विधायकों को पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में भेज दिया है। बताया जा रहा है कि पार्टी को अपने विधायकों के टूटने और दूसरी पार्टियों में जाने का डर सता रहा है।
पुडुचेरी स्थित “द शोर त्रिश्वम रिसॉर्ट” के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है, जहां एआईएडीएमके के विधायक ठहरे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, एआईएडीएमके के 47 विधायकों में से अधिकांश ने पार्टी नेतृत्व पर अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) को समर्थन देने का दबाव बनाया था। कुछ विधायकों ने विजय के खेमे में जाने की धमकी भी दी थी।
हालांकि, एआईएडीएमके ने साफ कर दिया है कि वह टीवीके को समर्थन नहीं देगी। यह फैसला पार्टी नेता एडप्पडी पलानीस्वामी के आवास पर हुई बैठक के बाद लिया गया।
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इधर, विजय ने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। उन्होंने राज्यपाल को 112 विधायकों के समर्थन की सूची सौंपी। लेकिन राज्यपाल ने कथित तौर पर यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत उनके पास नहीं है।
गौरतलब है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं। हालांकि विजय को अपनी दो जीती हुई सीटों में से एक छोड़नी होगी, जिससे पार्टी की संख्या 107 रह जाएगी। कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के बाद यह आंकड़ा 112 तक पहुंचा है, लेकिन 233 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 117 सीटों की जरूरत है।
इस बीच पट्टाली मक्कल कच्ची (पीएमके) के चार विधायक भी चेन्नई में विजय से मिले। वहीं विजय ने विदुथलाई चिरुथैगल कच्ची (वीसीके) प्रमुख थोल तिरुमावलवन से भी समर्थन मांगा है।
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