तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले में एक निजी स्कूल के शिक्षक को नाबालिग छात्रा के कथित यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, शिक्षक ने इंस्टाग्राम के जरिए छात्रा से संपर्क किया और बाद में उसके घर आने-जाने के दौरान कथित तौर पर उसका यौन शोषण किया।
पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ पॉक्सो यानी बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि जांच की जा रही है कि यह कथित घटना कब से चल रही थी। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए सहमति का सवाल ही नहीं उठता।
इस घटना ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने बच्चों के लिए उम्र के अनुरूप सोशल मीडिया प्रतिबंध, अभिभावकीय निगरानी और सुरक्षित डिजिटल माहौल की मांग की है।
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बाल अधिकार कार्यकर्ता रम्या श्रीराम ने कहा कि बच्चों को सोशल मीडिया पर सुरक्षित और उम्र के अनुरूप पहुंच मिलनी चाहिए, लेकिन ऐसी घटनाओं में बच्चे की सोशल मीडिया मौजूदगी को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षक और छात्र के बीच स्पष्ट सीमाएं बनाए रखने की जिम्मेदारी वयस्क की होती है।
उन्होंने स्कूलों में शिक्षकों और छात्रों के बीच निजी ऑनलाइन बातचीत को लेकर स्पष्ट नियम बनाने की जरूरत बताई। साथ ही बच्चों को ऐसी असहज बातचीत की शिकायत करने के लिए सुरक्षित माहौल देने पर जोर दिया।
एक अन्य बाल अधिकार कार्यकर्ता पदम नारायण ने बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की मांग की। उन्होंने बाल हेल्पलाइन को मजबूत करने की भी बात कही, ताकि बच्चे बिना डर अपनी शिकायत सामने रख सकें।
दुनिया के कई देशों में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नए नियम लागू किए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए हैं। यूरोपीय संघ में भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए उम्र आधारित प्रतिबंध और अभिभावकीय नियंत्रण पर विचार किया जा रहा है।
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