तेलंगाना में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले कथित फोन टैपिंग मामले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के अधिकारियों का दावा है कि केवल कुछ राजनीतिक नेताओं ही नहीं, बल्कि हजारों लोगों के कॉल डेटा रिकॉर्ड (सीडीआर) और इंटरनेट प्रोटोकॉल डेटा रिकॉर्ड (आईपीडीआर) भी उस समय अवैध रूप से एक्सेस किए गए थे।
SIT सूत्रों के अनुसार, यह अवैध निगरानी पुलिस की स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (SIB) के जरिए की गई थी। जांच में सामने आया है कि निगरानी तंत्र का इस्तेमाल न सिर्फ सूचनाएं जुटाने के लिए किया गया, बल्कि इसके जरिए कथित तौर पर चुनावी बॉन्ड के माध्यम से धन उगाही भी की गई।
एक SIT सूत्र ने दावा किया, “हमारे पास ऐसे ठोस सबूत हैं जो यह साबित करते हैं कि सर्विलांस तंत्र का अवैध इस्तेमाल कर चुनावी बॉन्ड के जरिए पैसे की वसूली की गई।” इस दावे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि इससे न सिर्फ निजता के अधिकार के उल्लंघन का सवाल उठता है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी गंभीर संदेह पैदा होता है।
और पढ़ें: फोन टैपिंग मामले में SIT ने के. टी. रामाराव को किया तलब
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान आरोपियों से हुई पूछताछ और उनके खुलासों के आधार पर कई नई जानकारियां सामने आई हैं। इन्हीं “नए सबूतों” और “ताजा सूचनाओं” के चलते SIT अब इस मामले में एक पूरक आरोपपत्र (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) दाखिल करने की तैयारी कर रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि अवैध रूप से एकत्र किए गए कॉल और इंटरनेट डेटा का उपयोग किस-किस स्तर पर और किन उद्देश्यों के लिए किया गया।
इस मामले ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है और विपक्षी दल इसे लोकतंत्र, निजता और कानून के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण बता रहे हैं।
और पढ़ें: सिकंदराबाद की पहचान मिटाने की कोशिश पर KCR की पार्टी का कांग्रेस पर तीखा हमला