केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि प्रादेशिक सेना (टेरिटोरियल आर्मी) न केवल आपात परिस्थितियों में देश की सैन्य क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है, बल्कि आपदा राहत, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, 6 अगस्त 2026 को रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए राजनाथ सिंह ने प्रादेशिक सेना को सरकार के ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण सहयोगी बताया।
बैठक में रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रादेशिक सेना ‘नागरिक-सैनिक’ की भावना को साकार करती है। इसके स्वयंसेवक अपने सामान्य नागरिक जीवन और पेशेवर जिम्मेदारियों को निभाते हुए जरूरत पड़ने पर देश की सैन्य सेवा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
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उन्होंने कहा कि प्रादेशिक सेना देश की सुरक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त क्षमता प्रदान करती है। किसी भी आपात स्थिति, प्राकृतिक आपदा या विशेष परिस्थितियों में इसकी भूमिका बेहद उपयोगी साबित होती है।
राजनाथ सिंह ने प्रादेशिक सेना के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि यह बल केवल रक्षा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, आपदा प्रबंधन और विभिन्न सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाता है।
प्रादेशिक सेना भारतीय सेना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें नागरिक अपने नियमित कार्यों के साथ सैन्य प्रशिक्षण लेते हैं और आवश्यकता पड़ने पर सेना की सहायता करते हैं। यह व्यवस्था देश में नागरिकों की भागीदारी के साथ रक्षा क्षमता को मजबूत करने का एक अनूठा मॉडल है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रादेशिक सेना देशभक्ति, सेवा और जिम्मेदारी की भावना का प्रतीक है। उन्होंने इसके जवानों और स्वयंसेवकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
बैठक के दौरान प्रादेशिक सेना की वर्तमान भूमिका, भविष्य की जरूरतों और देश की सुरक्षा व्यवस्था में इसके विस्तार पर भी चर्चा की गई।
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