भारत में तिब्बती समूहों ने मंगलवार को 67वां तिब्बती राष्ट्रीय उठान दिवस मनाया। इस अवसर पर चीन और तिब्बत के बीच विवाद के समाधान की मांग करते हुए प्रदर्शन और श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए।
दिल्ली में, चीन के दूतावास के बाहर प्रदर्शन कर रहे 24 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई प्रदर्शन की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई।
धर्मशाला में निर्वासित तिब्बती सरकार की सेंट्रल तिब्बती एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में कई अंतरराष्ट्रीय नेता भी शामिल हुए। इसमें यूरोपीय संसद के पूर्व अध्यक्ष हांस-गर्ट पॉटरिंग, चेक गणराज्य की सीनेट की उपाध्यक्ष जिरी ओबरफाल्ज़र और जर्मनी के सांसद माइकल ब्रांड उपस्थित रहे।
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CTA ने एक बयान में कहा कि इस दिन को 1959 के उठान की वर्षगांठ के रूप में मनाया गया, जब लाखों तिब्बती ने ल्हासा में चीनी शासन के खिलाफ अपने प्राणों की आहुति दी। इस कार्यक्रम में उनके बलिदान को याद किया गया और शांति, न्याय एवं तिब्बत की आज़ादी के लिए समर्थन व्यक्त किया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में तिब्बती समुदाय द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिब्बत के संघर्ष और चीन के दमन को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही, दिल्ली में गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों के मामले से यह भी संकेत मिलता है कि सुरक्षा और कूटनीतिक संवेदनशीलता बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण है।
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