तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कांग्रेस के साथ संभावित विलय की सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के शीर्ष सूत्रों ने कहा कि इस तरह की किसी भी चर्चा या प्रस्ताव की उन्हें कोई जानकारी नहीं है और ऐसी रिपोर्ट पूरी तरह “आधारहीन” हैं।
टीएमसी ने स्पष्ट किया कि न तो किसी स्तर पर विलय को लेकर कोई बातचीत हुई है और न ही ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन है। पार्टी का कहना है कि उसका ध्यान विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के घटक दलों के बीच बेहतर समन्वय और एकजुटता बढ़ाने पर है, ताकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ मजबूत मोर्चा तैयार किया जा सके।
यह बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी अपने संसदीय ढांचे में अंदरूनी संकट का सामना कर रही है। हाल ही में पार्टी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने इस्तीफा दे दिया, जबकि उससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय ने भी पार्टी छोड़ दी थी। इससे पार्टी की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं।
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इस बीच, दिल्ली में विपक्षी एकता को लेकर हलचल तेज है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की मुलाकात के एक दिन बाद पार्टी सूत्रों ने विलय की खबरों को अफवाह बताया। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि कांग्रेस ने ममता बनर्जी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अभिषेक बनर्जी को महासचिव पद देने की पेशकश की थी, जिसे टीएमसी ने गलत बताया।
इसी दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी की भी मुलाकात हुई, जिसे विपक्षी गठबंधन के भीतर समन्वय मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
उधर, सुष्मिता देव के इस्तीफे ने टीएमसी को एक और झटका दिया है। उन्होंने राज्यसभा और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया है और उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
टीएमसी का कहना है कि विपक्षी एकता जरूरी है, लेकिन किसी भी प्रकार के विलय की बात पूरी तरह गलत और भ्रामक है।
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