पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी के लिए राजनीतिक संकट लगातार गहराता दिख रहा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधायकों की बगावत के बाद अब पार्टी के भीतर संसद में भी विद्रोह की खबरें सामने आई हैं। टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि पार्टी के लगभग 20 सांसदों ने केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन करने का फैसला किया है।
सोमवार को जब ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल थे, तब काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि सांसदों का एक समूह जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र देकर अपने फैसले की औपचारिक जानकारी देगा। उन्होंने दावा किया कि करीब 20 सांसद इस कदम का समर्थन कर रहे हैं।
हालांकि बागी सांसदों ने फिलहाल टीएमसी छोड़ने या भाजपा में शामिल होने का फैसला नहीं किया है। उनका कहना है कि वे एक अलग समूह के रूप में काम करते हुए पश्चिम बंगाल के विकास के लिए एनडीए का समर्थन करेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने की रणनीति हो सकता है।
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विवाद का एक अन्य पहलू लोकसभा में टीएमसी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के पद को लेकर है। बागी गुट का दावा है कि काकोली घोष दस्तीदार अब भी इस पद पर हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व का कहना है कि उन्हें हटाकर कल्याण बनर्जी को नियुक्त किया जा चुका है। इस संबंध में लोकसभा सचिवालय को मई महीने में पत्र भी भेजा गया था।
लोकसभा में टीएमसी के वर्तमान में 28 सांसद हैं। यदि 20 सांसद औपचारिक रूप से एनडीए का समर्थन करते हैं, तो उनकी संख्या दल-बदल कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई सीमा से अधिक होगी।
इस घटनाक्रम से टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और ममता बनर्जी के नेतृत्व के सामने खड़ी चुनौतियां एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं।
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