तमिलनाडु में अवैध किडनी बिक्री से जुड़े एक गंभीर मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने राज्य के स्वास्थ्य सचिव को जांच कराने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकतेश ने तब दिया जब पेराम्बलुर स्थित धनलक्ष्मी श्रीनिवासन मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ने अपने गुर्दा प्रत्यारोपण लाइसेंस रद्द करने के फैसले को अदालत में चुनौती दी।
अस्पताल का कहना है कि उसका लाइसेंस रद्द करने का निर्णय मनमाना और अनुचित है, जबकि राज्य सरकार का तर्क है कि संस्थान के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं और अवैध गतिविधियों की शिकायतें आई हैं।
न्यायमूर्ति वेंकतेश ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में पारदर्शिता और कड़ी निगरानी आवश्यक है, ताकि मरीजों के अधिकारों की रक्षा हो सके और अवैध व्यापार पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सचिव को इस मामले की गहराई से जांच कर यह स्पष्ट करना होगा कि क्या वाकई अस्पताल किसी अवैध किडनी प्रत्यारोपण रैकेट में शामिल था।
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अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी हो तथा अस्पताल को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाए। इस मामले ने तमिलनाडु में अंग प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं की निगरानी और नियामक ढांचे पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह आदेश ऐसे समय आया है जब राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता और अंग प्रत्यारोपण प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर चिंताएँ व्यक्त की जा रही हैं।
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