ईरान के खिलाफ शुरू हुए युद्ध के बाद पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच आमने-सामने मुलाकात हुई। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक व्हाइट हाउस में हुई, जो करीब डेढ़ घंटे तक चली। इस दौरान ईरान के साथ जारी संघर्ष के अलावा गाजा, लेबनान और अब्राहम समझौते जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
बैठक के बाद बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे शानदार बताते हुए कहा कि यह केवल औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि साझा लक्ष्यों और आपसी सहयोग को लेकर गंभीर बातचीत थी। उन्होंने कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और क्षेत्रीय सुरक्षा दोनों देशों की प्रमुख प्राथमिकता है।
व्हाइट हाउस बैठक की जानकारी रखने वाले एक इजरायली अधिकारी के अनुसार, नेतन्याहू ने राष्ट्रपति ट्रंप और उनके कैबिनेट सदस्यों से स्पष्ट कहा कि अगर ईरान इजरायल पर हमला करता है तो इजरायल इसका जवाब देगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की रणनीति को लेकर वह अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्णयों पर भरोसा करेंगे।
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बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी मौजूद थे। नेतन्याहू ने बताया कि ट्रंप की पूरी वरिष्ठ टीम इस वार्ता में शामिल थी। बैठक ऐसे समय हुई जब दोनों नेता घरेलू राजनीतिक दबावों का सामना कर रहे हैं। नेतन्याहू आगामी चुनावों और ट्रंप के साथ संबंधों को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं, जबकि ट्रंप पर भी ईरान युद्ध को समाप्त करने का दबाव बढ़ रहा है।
मुलाकात से पहले ट्रंप ने ईरान के संभावित परमाणु स्थल पिकएक्स माउंटेन को लेकर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि ऐसी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं बननी चाहिए।
बैठक के बाद ट्रंप, नेतन्याहू और जेडी वेंस अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इस दौरान नेतन्याहू की मुलाकात यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से भी हुई।
वहीं, बैठक के कुछ घंटे बाद ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि सभी मिसाइलों को रोक लिया गया और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ।
बैठक में लेबनान और गाजा में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल को लेकर भी चर्चा हुई। हालांकि, ईरान को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू की रणनीतियों में मतभेद बने हुए हैं।
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