अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक तेल कीमतों में आई तेज़ बढ़ोतरी को लेकर चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि यह ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने के लिए चुकाई जाने वाली “बहुत छोटी कीमत” है। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच तेल बाजारों में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है।
रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र के कई देश इस संघर्ष में खिंचते नजर आए हैं। इससे महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरियों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आईं। बिजनेस की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी तेल वायदा कीमतों में करीब 18 प्रतिशत की तेजी आई और यह लगभग 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत भी लगभग 16 प्रतिशत बढ़ गई।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी अस्थायी है। उन्होंने कहा कि जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम का खतरा खत्म हो जाएगा तो तेल की कीमतें तेजी से नीचे आ जाएंगी। ट्रंप ने कहा, “अल्पकालिक तेल कीमतें, जो जल्द ही गिर जाएंगी, अमेरिका और दुनिया की सुरक्षा और शांति के लिए चुकाई जाने वाली बहुत छोटी कीमत हैं। जो इससे असहमत हैं, वे मूर्ख हैं।”
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हालांकि इस बढ़ोतरी का असर आम लोगों पर भी दिख रहा है। अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत रविवार को 3.45 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई, जो एक सप्ताह में लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि है। इससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं तो इससे महंगाई दोबारा बढ़ सकती है। इससे उपभोक्ता खर्च घटने, आर्थिक वृद्धि धीमी पड़ने और आगामी मिडटर्म चुनावों से पहले राजनीतिक दबाव बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। पश्चिम एशिया में जारी टकराव ने एक बार फिर ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक रणनीति के बीच टकराव को उजागर कर दिया है।
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