तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने शुक्रवार को कहा कि राज्य को जवाहर नवोदय विद्यालयों की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर आवश्यकता पड़ी तो नवोदय स्कूलों की स्थापना के लिए विशेष विधानसभा सत्र बुलाकर प्रस्ताव पारित किया जाएगा। उनका यह बयान सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के एक दिन बाद आया है, जिसमें अदालत ने तमिलनाडु को हिंदी को लेकर अपनी सोच पर पुनर्विचार करने की सलाह दी थी।
उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु हिंदी या किसी अन्य भाषा के खिलाफ नहीं है, लेकिन राज्य अपनी दो-भाषा नीति को बनाए रखने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में तमिल और अंग्रेजी को लेकर लंबे समय से दो-भाषा नीति लागू है और इसे राज्य की शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा माना जाता है।
उन्होंने नवोदय विद्यालयों को लेकर कहा कि राज्य में पहले से ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने वाले मॉडल स्कूल मौजूद हैं। उनके अनुसार, इन मौजूदा संस्थानों को मजबूत करने के लिए संसाधन उपलब्ध कराना अधिक महत्वपूर्ण है।
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यह विवाद सुप्रीम कोर्ट में नवोदय विद्यालयों की स्थापना से जुड़े मामले की सुनवाई के बाद तेज हुआ है। 17 सितंबर को न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने तमिलनाडु सरकार की पहले के आदेश को वापस लेने की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने राज्य को हर जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए जमीन चिन्हित करने हेतु तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया और केंद्र तथा राज्य के बीच बातचीत जारी रखने को कहा।
तमिलनाडु सरकार नवोदय विद्यालयों का विरोध मुख्य रूप से उनकी तीन-भाषा व्यवस्था को लेकर करती रही है, जबकि राज्य अपनी दो-भाषा नीति पर कायम है। अदालत ने दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने पर जोर दिया है।
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