कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने शुक्रवार को 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई मर्चेंट लेनदेन पर लगाए गए 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर केंद्र की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के दबाव के डर से सरकार अपनी ही कैशलेस अर्थव्यवस्था की पहल से पीछे हट रही है।
इंदौर, मध्य प्रदेश में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पवन खेड़ा ने नए यूपीआई नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए जिस व्यवस्था को आगे बढ़ाया, अब उसी पर शुल्क लगाने की दिशा में कदम उठाया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार ने यूपीआई की सफलता का श्रेय लेने की कोशिश की थी।
नए नियमों के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा।
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सरकार के अनुसार यह शुल्क सीधे ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा, बल्कि मर्चेंट भुगतान व्यवस्था में लागू होगा। 2,000 रुपये तक के मर्चेंट लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इसके अलावा व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई भुगतान भी राशि की परवाह किए बिना मुफ्त रहेंगे।
कांग्रेस ने नए एमडीआर प्रावधान का विरोध करते हुए इसे उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर संभावित अतिरिक्त बोझ से जोड़ा है। वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि नए नियमों से आम ग्राहकों के यूपीआई इस्तेमाल पर सीधा शुल्क नहीं लगेगा।
सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि छोटे मूल्य वाले लेनदेन, जो मर्चेंट यूपीआई भुगतान के 95 प्रतिशत से अधिक हैं, नए शुल्क से प्रभावित नहीं होंगे। छोटे कारोबारियों के लिए भी कुछ छूट का प्रावधान रखा गया है।
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