अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान अभी भी इस्लामाबाद में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिलने के लिए तैयार नहीं है, जिससे वार्ता की संभावनाएं कमजोर पड़ती दिख रही हैं।
पाकिस्तान के एक मीडिया संस्थान के प्रमुख कमरान खान के मुताबिक, वार्ता के दूसरे दौर की संभावनाएं तेजी से कम हो रही हैं। उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के वाशिंगटन से इस्लामाबाद पहुंचने की उम्मीद थी, लेकिन ईरान ने अब तक बैठक के लिए सहमति नहीं दी है।
सूत्रों के अनुसार, ईरान ने बातचीत शुरू करने के लिए एक सख्त शर्त रखी है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका को पहले होर्मुज जलडमरूमध्य के पास लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंध को हटाना होगा। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां की स्थिति का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ता है।
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अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विशेष दूत स्टीव विटकॉफ कर रहे हैं, जिनके साथ वरिष्ठ सलाहकार और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर भी शामिल हैं। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, जिससे पहले उम्मीद जगी थी कि वार्ता आगे बढ़ सकती है।
इस बीच, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद को कड़े सुरक्षा घेरे में रखा गया है। प्रमुख सड़कों को बंद कर दिया गया है और रेड जोन में भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। इससे पहले हुई वार्ता भी 21 घंटे तक चली थी, लेकिन उसमें कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया था।
ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और शर्तों के चलते शांति वार्ता का भविष्य फिलहाल अनिश्चित नजर आ रहा है।
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